तहज्जुद की नमाज़: रात में उठें और फिर भी पूरी नींद लें
दाऊद की नमाज़ नींद का एक शेड्यूल भी है। रात की नमाज़ के बारे में सुन्नत क्या कहती है, रात में उठने की क्या क़ीमत है, और इसे ऐसे कैसे प्लान करें कि निभ सके।
रात की नमाज़ के बारे में क़ुरआन और सुन्नत क्या कहते हैं
तहज्जुद का नाम इस आयत की क्रिया से लिया गया है, जिसमें नबी ﷺ को संबोधित किया गया है:
وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَتَهَجَّدْ بِهِۦ نَافِلَةً لَّكَ عَسَىٰٓ أَن يَبْعَثَكَ رَبُّكَ مَقَامًا مَّحْمُودًا
तथा आप रात के कुछ समय में उठकर नमाज़ (तहज्जुद) पढ़िए। यह आपके लिए अतिरिक्त है। क़रीब है कि आपका पालनहार आपको "मक़ामे महमूद" पर खड़ा करे। (क़ुरआन, सूरा अल-इसरा, 17:79)[9]
रात के आख़िरी तिहाई हिस्से का अपना एक दर्जा है। नबी ﷺ ने फ़रमाया:
عن أبي هريرة رضي الله عنه: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «يَنْزِلُ رَبُّنَا تَبَارَكَ وَتَعَالَى كُلَّ لَيْلَةٍ إِلَى السَّمَاءِ الدُّنْيَا حِينَ يَبْقَى ثُلُثُ اللَّيْلِ الْآخِرُ، يَقُولُ: «مَنْ يَدْعُونِي فَأَسْتَجِيبَ لَهُ؟ مَنْ يَسْأَلُنِي فَأُعْطِيَهُ؟ مَنْ يَسْتَغْفِرُنِي فَأَغْفِرَ لَهُ؟».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "हमारा बरकत वाला तथा उच्च रब हर रात, जबकि रात का एक तिहाई भाग शेष रह जाता है, दुनिया से निकट वाले आसमान पर उतरकर फरमाता है : कौन है जो दुआ करे कि मैं उसे क़बूल करूँ; कौन है जो मुझसे माँगे कि मैं उसे प्रदान करूँ, कौन है जो मुझसे क्षमा माँगे कि मैं उसे क्षमा कर दूँॽ'' — इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है[10]
यह आख़िरी तिहाई कब शुरू होता है, यह इस पर निर्भर है कि आप जहाँ रहते हैं वहाँ रात कितनी लंबी है, और यह साल भर बदलता रहता है। यह ब्लॉग नमाज़ के समय प्रकाशित नहीं करता: इसे कैसे तय करें, यह अपनी मस्जिद या किसी भरोसेमंद आलिम से पूछें।
दाऊद की नमाज़ नींद का शेड्यूल भी है
عن عبد الله بن عمرو بن العاص رضي الله عنهما قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إن أَحَبَّ الصيام إلى الله صِيَامُ داود، وأحب الصلاة إلى الله صلاة داود، كان يَنَامُ نِصْفَ اللَّيْلِ، وَيَقُومُ ثُلُثَهُ، وَيَنَامُ سُدُسَهُ، وكان يصوم يومًا ويُفطِرُ يومًا».
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस- रज़ियल्लाहु अन्हुमा-कहते हैं कि अल्लल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह के निकट सबसे प्रिय रोज़ा दाऊद- अलैहिस्सलाम- का रोज़ा और सबसे प्रिय नमाज़ दाऊद- अलैहिस्सलाम- की नमाज़ है। वह आधी रात सोते, फिर एक तिहाई रात नमाज़ पढ़ते और शेष छठा भाग सोते थे। इसी तरह एक दिन रोज़ा रखते और एक दिन बिना रोज़े के रहते थे। — इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।[1]
नींद की योजना बनाने वाले की नज़र से पढ़ें तो यह तीन हिस्सों वाली रात है: नींद, नमाज़, नींद। आइशा (अल्लाह उनसे राज़ी हो) ने नबी ﷺ की अपनी रातों का वर्णन भी इसी क्रम में किया, पहले नींद और आख़िर में नमाज़:
عن عائشة رضي الله عنها أن النبي صلى الله عليه وسلم كان يَنَام أول اللَّيل، ويقوم آخره فَيُصلِّي.
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के प्रथम भाग में सोते और अंतिम भाग में उठकर नमाज़ पढ़ते थे। — इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।[11]
- ½ नींद
- ⅓ नमाज़
- ⅙ फिर से नींद
अनुपात हदीस से, किसी भी लंबाई की रात पर। आपकी रात कितनी लंबी है, कब शुरू और कब ख़त्म होती है, यह आपकी मस्जिद बताएगी। स्रोत: [1, 10]
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| नींद | ½ |
|---|---|
| नमाज़ | ⅓ |
| फिर से नींद | ⅙ |
| रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा | ⅓ |
रात की कुछ अलग-अलग लंबाइयों पर दाऊद की रात के तीन हिस्से कितने बनते हैं, यह नीचे है। अपनी रात की लंबाई अपनी मस्जिद से लें; बाक़ी सिर्फ़ हिसाब है।
| अगर रात इतनी लंबी हो | पहली नींद (½) | नमाज़ (⅓) | दूसरी नींद (⅙) | कुल नींद |
|---|---|---|---|---|
| 8 घंटे | 4 घं | 2 घं 40 मि | 1 घं 20 मि | 5 घं 20 मि |
| 9 घंटे | 4 घं 30 मि | 3 घं | 1 घं 30 मि | 6 घं |
| 10 घंटे | 5 घं | 3 घं 20 मि | 1 घं 40 मि | 6 घं 40 मि |
| 10½ घंटे | 5 घं 15 मि | 3 घं 30 मि | 1 घं 45 मि | 7 घं |
| 12 घंटे | 6 घं | 4 घं | 2 घं | 8 घं |
पेच आख़िरी कॉलम में है। नींद विज्ञान वयस्कों को नियमित रूप से 7 घंटे या उससे ज़्यादा सोने की सलाह देता है।[2] रात का दो-तिहाई हिस्सा यह संख्या सिर्फ़ लंबी रातों में छूता है। गर्मियों की छोटी रात में पूरा क्रम आपको इससे काफ़ी नीचे छोड़ देता है, इसीलिए इस लेख का बाक़ी हिस्सा छोटे रूपों और उनकी क़ीमत चुकाने के तरीक़े के बारे में है।
बँटी हुई रात अपने आप में अजीब नहीं है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ में एक प्रयोग में, हर रात 14 घंटे अँधेरे में बिताने वाले स्वस्थ स्वयंसेवक आम तौर पर कई-कई घंटों के दो हिस्सों में सोने लगे, जिनके बीच 1 से 3 घंटे जागते रहे।[12] वह बहुत लंबी रातों वाली एक लैब थी, आम सोने का कमरा नहीं। फिर भी इससे पता चलता है कि आधी रात को जागना अपने आप में किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं है।
आख़िरी तिहाई में उठना भारी क्यों लगता है
गहरी नींद रात की शुरुआत में ज़्यादा होती है। यह हर नींद चक्र के अंदर बढ़ती है, और यह कितनी तेज़ी से बढ़ती है और कितनी गहरी होती है, दोनों एक चक्र से अगले चक्र में घटते जाते हैं।[3] रात के बाद वाले हिस्से तक आपकी सबसे गहरी नींद का ज़्यादातर हिस्सा पीछे छूट चुका होता है।
↑ गहरी नींद
सोने के बाद के घंटे
- 8 घंटे की रात का आख़िरी तिहाई
यह पैटर्न का ख़ाका है, कोई रिकॉर्डिंग नहीं: गहरी नींद पहले चक्रों में सबसे ज़्यादा होती है और हर अगले चक्र में घटती है। स्रोत: [3]
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| 8 घंटे की रात का आख़िरी तिहाई | 5.3–8 घंटे |
|---|---|
| गहरी (धीमी तरंग वाली) नींद | नींद के पहले चक्रों में सबसे ज़्यादा, उसके बाद हर चक्र में कम |
गहरी नींद से जागने पर सुस्ती बढ़ती है या नहीं, यह तय नहीं है; अध्ययनों के नतीजे अलग-अलग हैं।[4] जो साफ़ है, वह है घड़ी। जागने के बाद की सुस्ती जैविक रात के दौरान, शरीर के तापमान के सबसे निचले बिंदु के आसपास, सबसे तेज़ होती है। एक अध्ययन में नींद की कमी ने इसे और बिगाड़ा, ख़ासकर जब लोगों को चक्र के सबसे निचले बिंदु पर, रात लगभग 3 बजे, जगाया गया।[4] तो अगर आप आम तौर पर सुबह तक लगातार सोते हैं, तो उम्मीद रखें कि रात की नमाज़ के पहले मिनट सबसे मुश्किल होंगे, और छोटी रात के बाद और भी मुश्किल।
उन मिनटों में जो मदद करता है, वह वही है जो फ़ज्र के लिए: सुन्नत के तीन क़दम, और नींद विज्ञान क्या जोड़ता है। धुंध इतनी देर क्यों रहती है, यह एक अलग लेख का विषय है: स्लीप इनर्शिया, आसान शब्दों में।
रात की नमाज़ की क़ीमत, और उसे कैसे चुकाएँ
उठना नींद से वसूल होता है: जागे हुए मिनट, और फिर से सोने में लगने वाला समय। क्या टूटी हुई नींद उतनी ही नींद के एक हिस्से में होने से बदतर है? एक लैब अध्ययन इसी ओर इशारा करता है। जिन स्वस्थ वयस्कों को लगातार तीन रातों तक हर रात आठ बार जगाया गया, उन्होंने उस समूह के मुक़ाबले ज़्यादा गहरी नींद और ज़्यादा अच्छा मूड खोया जो उतना ही कुल समय एक छोटे हिस्से में सोया।[13] आठ बार जागना एक नमाज़ से कहीं ज़्यादा टूटा हुआ है, इसलिए यह अध्ययन नहीं बता सकता कि एक योजनाबद्ध जागना क्या असर करता है।
अच्छी ख़बर यह है कि कुल नींद पूरी की जा सकती है। 90 स्वस्थ वयस्कों पर एक लैब अध्ययन में, लोग 10 दिनों तक रात में 4.2 से 8.2 घंटे बिस्तर पर रहे, और उनमें से ज़्यादातर ने दोपहर में 2.4 घंटे तक की झपकी भी ली। चुस्ती और नींद आना मुख्य रूप से 24 घंटे में बिस्तर पर बिताए कुल समय पर निर्भर था, चाहे वह रात और झपकी में कैसे भी बँटा हो।[5]
तो नियम सीधा है: रात में जितना समय आप जागते हैं, उतना अपनी नींद में कहीं और जोड़ दें। उतना पहले सो जाएँ, या दोपहर की शुरुआत में झपकी लें।
सुन्नत की तय की हुई सीमाएँ
सुन्नत में रात की नमाज़ की एक हद है। अबू दरदा (अल्लाह उनसे राज़ी हो) पूरी रात नमाज़ पढ़ना चाहते थे, और उनके दीनी भाई सलमान ने उन्हें रोका:
عن أبي جحيفة وهب بن عبد الله رضي الله عنه قال: آخى النبي صلى الله عليه وسلم بين سلمان وأبي الدرداء، فزار سلمان أبا الدرداء فرأى أم الدرداء مُتَبَذِّلَةً، فقال: ما شأنُكِ؟ قالت: أخوك أبو الدرداء ليس له حاجة في الدنيا، فجاء أبو الدرداء فصنع له طعاما، فقال له: كل فإني صائم، قال: ما أنا بآكل حتى تأكل فأكل، فلما كان الليل ذهب أبو الدرداء يقوم فقال له: نم، فنام، ثم ذهب يقوم فقال له: نم. فلما كان من آخر الليل قال سلمان: قم الآن، فصليا جميعا فقال له سلمان: إن لربك عليك حقا، وإن لنفسك عليك حقا، ولأهلك عليك حقا، فأعطِ كل ذي حق حقه، فأتى النبي صلى الله عليه وسلم فذكر ذلك له فقال النبي صلى الله عليه وسلم : «صدق سلمان».
अबू जुहैफा वहब बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) और अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) को आपस भाई बनाया था। चुनांचे एक दिन सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मिलने गए, तो उन्होंने उम्म-ए-दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को बहुत ही अस्तव्यस्त अवस्था में देखा। अतः, उनसे पूछा : तुम्हारी यह हालत क्यों है? इसपर वह बोलीं कि तुम्हारे भाई अबू दरदा को दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है। इतने में अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) भी आ गए। उन्होंने सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के लिए खाना तैयार करवाया, फिर उनसे कहा : तुम खाओ, मैं रोज़े से हूँ। सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कहा : जब तक तुम नहीं खाओगे, मैं भी नहीं खाऊँगा। आख़िरकार अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने खाना खा लिया। फिर जब रात हुई तो अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) नमाज़ के लिए जाने लगे। यह देख सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनसे कहा : सो जाओ। चुनांचे वह सो गए। थोड़ी देर बाद फिर उठने लगे, तो सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कहा : अभी सोए रहो। चुनांचे जब रात का अंतिम भाग आरंभ हआ, तो सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कहा : अब उठो। चुनांचे दोनों ने नमाज़ पढ़ी और उसके बाद सलमान (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से कहा : निश्चय ही तुमपर तुम्हारे रब का अधिकार है। निश्चय ही तुमपर स्वंय तुम्हारे शरीर तथा तुम्हारी पत्नी का अधिकार है। अतः प्रत्येक अधिकार वाले को उसका अधिकार दो। फिर अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और आपको सारी घटना सुनाई, तो आपने फ़रमाया : "सलमान ने सही कहा है।" — इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।[6]
और उस पल के लिए जब नमाज़ के दौरान नींद हावी हो जाए:
عن عائشة رضي الله عنها مرفوعاً: «إذا نَعَسَ أحدكم وهو يصلي فَلْيَرْقُدْ حتى يذهب عنه النوم، فإن أحدكم إذا صلى وهو نَاعِسٌ لا يدري لعله يذهب يستغفر فَيَسُبُّ نَفْسَهُ».
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब तुममें से किसी को नमाज़ पढ़ने की दशा में नींद आए, तो सो जाए, यहाँ तक नींद खत्म हो जाए। क्योंकि ऊँघते हुए जब कोई नमाज़ पढ़ता है, तो वह नहीं जान पाता कि अपने लिए क्षमा की दुआ कर रहा है या अपने हक़ में बददुआ कर रहा है।" — इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।[7]
जब आइशा ने नबी ﷺ को एक ऐसी औरत के बारे में बताया जो अपनी बहुत सारी नमाज़ों के लिए जानी जाती थी, तो आपने फ़रमाया:
عن عائشة رضي الله عنها : أن النبي صلى الله عليه وسلم دخل عليها وعندها امرأة، قال: «من هذه؟» قالت: هذه فلانة تذكر من صلاتها. قال: «مَهْ، عليكم بما تطيقون، فوالله لا يَمَلُّ الله حتى تَمَلُّوا» وكان أحب الدين إليه ما داوم صاحبه عليه.
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक बार उनके पास तशरीफ़ लाए। वहाँ एक औरत बैठी थी। आपने पूछाः "यह कौन है?" आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- ने कहा कि यह अमुक औरत है, जो अपनी नमाज़ का हाल बयान कर रही है। आपने फ़रमाया : "ठहरो! तुम उतना ही अमल करो, जितने की क्षमता रखते हो। अल्लाह की सौगंध, अल्लाह नहीं उकताएगा, यहाँ तक कि तुम ही उकता जाओगे।" तथा आपकी नज़र में वही अमल सबसे प्रिय था, जिसे करने वाला हमेशा करता रहे। — इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।[8]
तो लक्ष्य वह रात की नमाज़ है जिसे आप निभा सकें, न कि वह सबसे लंबी नमाज़ जो आप एक बार कर पाएँ। किसी नई दिनचर्या को अपने आप चलने में कितना समय लगता है, यह एक अलग लेख का विषय है: आदतें बनने में असल में कितना समय लगता है।
इसे अपनी रात में फ़िट करने के तीन तरीक़े
ये नींद की योजना बनाने के तरीक़े हैं, फ़तवे नहीं। कितनी और कब नमाज़ पढ़ें, यह आपके और अल्लाह के बीच की बात है; फ़िक़्ह के सवालों के लिए किसी आलिम से पूछें।
- फ़ज्र से ठीक पहले। फ़ज्र के अलार्म से उतना पहले एक अलार्म लगाएँ जितनी देर आप नमाज़ पढ़ना चाहते हैं, और उतना ही पहले सो जाएँ। आपकी नींद एक ही हिस्से में रहती है।
- रात में उठें, फिर वापस बिस्तर पर। उठें, नमाज़ पढ़ें और फ़ज्र तक फिर सो जाएँ, जैसे दाऊद की रात में, जो अपनी नमाज़ के बाद फिर सोते थे।[1] सोने का समय जागने के समय और फिर से नींद आने में लगने वाले समय जितना पहले कर दें। बिस्तर पर लौटते समय रोशनी धीमी और फ़ोन दूर रखें: एक लैब अध्ययन में सोने से पहले रोशनी देने वाले टैबलेट पर पढ़ने से लोगों को छपी किताब पढ़ने की तुलना में सोने में ज़्यादा समय लगा।[14]
- दाऊद की पूरी रात। सर्दियों की लंबी रातों में ऊपर की तालिका दिखाती है कि इसमें भी 7 घंटे की नींद बच सकती है। छोटी रातों में यह कमी झपकी को पूरी करनी होगी।[5]


